रूपये के अवमूल्यन के कारण 

पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था

संदर्भ

  • भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले तीव्रता से अवमूल्यित हुआ है। रुपये-डॉलर विनिमय दर 2025 में लगभग ₹85 प्रति डॉलर से बढ़कर 2026 में ₹96 प्रति डॉलर से अधिक हो गई है।

विनिमय दर क्या है?

  • विनिमय दर किसी मुद्रा के मूल्य को दूसरी मुद्रा की तुलना में दर्शाती है। यह निर्धारित करती है कि एक इकाई विदेशी मुद्रा खरीदने के लिए कितनी घरेलू मुद्रा की आवश्यकता होगी।
    • भारत में रुपये-डॉलर विनिमय दर यह बताती है कि एक अमेरिकी डॉलर खरीदने के लिए कितने रुपये चाहिए।
  • विनिमय दरें मुख्यतः अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में मुद्राओं की मांग और आपूर्ति से निर्धारित होती हैं।

भारतीय रूपये का अवमूल्यन क्यों हो रहा है?

  • निरंतर व्यापार घाटा: भारत आयात अधिक और निर्यात कम करता है, जिससे निरंतर माल व्यापार घाटा होता है।
  • भारतीय आयातक विदेशी आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान करने के लिए रुपये को डॉलर में बदलते हैं, जिससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है।
  • कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि: भारत अपनी कच्चे तेल की आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात करता है। वैश्विक तेल कीमतों में वृद्धि भारत के आयात बिल को बढ़ा देती है।
  • अधिक तेल आयात से डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव पड़ता है।
  • चालू खाते का घाटा (CAD): आयात निर्यात से अधिक होने के कारण भारत निरंतर चालू खाते का घाटा दर्ज करता है।
  • यद्यपि भारत सॉफ़्टवेयर निर्यात और प्रेषण से विदेशी मुद्रा अर्जित करता है, लेकिन ये प्रवाह प्रायः व्यापार घाटे के अन्तर को समाप्त नहीं कर पाते।
  • विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) का बहिर्गमन: विदेशी निवेशक शेयरों और बॉन्ड में निवेश करते हैं।
  • वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों के आधार पर FPI अत्यधिक अस्थिर रहता है और निवेशक जल्दी धन स्थानांतरित कर लेते हैं।
  • अमेरिका में बढ़ती ब्याज दरें: अमेरिका में उच्च ब्याज दरें वैश्विक निवेशकों को अमेरिकी वित्तीय परिसंपत्तियों की ओर आकर्षित करती हैं।
  • निवेशक भारत जैसे उभरते बाज़ारों से धन निकालकर सुरक्षित अमेरिकी परिसंपत्तियों में निवेश करते हैं। इससे भारत से पूंजी बहिर्गमन होता है और रुपये पर दबाव बढ़ता है।
  • वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता: भू-राजनीतिक तनाव वैश्विक वित्तीय बाज़ारों में अनिश्चितता बढ़ाते हैं। अस्थिरता के समय निवेशक अमेरिकी डॉलर जैसे सुरक्षित परिसंपत्तियों को प्राथमिकता देते हैं, जिससे डॉलर मज़बूत होता है।

अवमूल्यित रुपये का भारत की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

  • मुद्रास्फीति दबाव में वृद्धि: आयात लागत बढ़ने से ईंधन और आवश्यक वस्तुओं की घरेलू कीमतें बढ़ती हैं। इससे परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत भी बढ़ती है तथा आयातित मुद्रास्फीति उत्पन्न होती है।
  • बाहरी ऋण भार में वृद्धि: डॉलर में ऋण लेने वाली भारतीय कंपनियों को रुपये के अवमूल्यन के पश्चात अधिक रुपये चुकाने पड़ते हैं। इससे ऋण सेवा लागत बढ़ती है और कॉर्पोरेट लाभप्रदता प्रभावित होती है।
  • वित्तीय बाज़ार अस्थिरता: बड़े पैमाने पर FPI बहिर्गमन से शेयर बाज़ार में गिरावट और वित्तीय अस्थिरता होती है, जिससे निवेशकों का विश्वास कमजोर होता है।
  • निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता: कमजोर रुपया भारतीय वस्तुओं को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में सस्ता बनाता है। विदेशी खरीदार कम डॉलर कीमत पर भारतीय उत्पाद खरीद सकते हैं। किंतु भारत के मामले में यह लाभ सीमित रहता है क्योंकि आयात पर उच्च निर्भरता है।

रुपये को स्थिर करने में RBI की भूमिका

  • विदेशी मुद्रा बाज़ार परिचालन: RBI स्पॉट और फ़ॉरवर्ड दोनों बाज़ारों में हस्तक्षेप करता है। जब अचानक पूंजी बहिर्गमन से रुपया तीव्रता से अवमूल्यित होता है, तो RBI अमेरिकी डॉलर बेचकर अतिरिक्त मांग को अवशोषित करता है और भारी प्रवाह के समय डॉलर खरीदता है।
  • मौद्रिक उपाय: RBI ब्याज दर और मौद्रिक नीति उपायों का उपयोग विनिमय दर स्थिरता बनाए रखने के लिए करता है।
  • उच्च ब्याज दरें विदेशी पूंजी प्रवाह आकर्षित करती हैं और रुपये की मांग को समर्थन देती हैं।
  • RBI मुद्रास्फीति को नियंत्रित करता है और मौद्रिक नीति उपायों के माध्यम से निवेशकों का विश्वास बनाए रखता है।
  • तरलता उपाय: RBI बैंकिंग प्रणाली में तरलता की स्थिति का प्रबंधन करता है ताकि वित्तीय बाज़ारों में अत्यधिक अस्थिरता कम हो।
  • RBI नकद आरक्षित अनुपात (CRR), सांविधिक तरलता अनुपात (SLR) और तरलता समायोजन सुविधा (LAF) जैसे साधनों के माध्यम से तरलता का प्रवाह नियंत्रित करता है।

आगे की राह

  • तेल पर निर्भरता कम करना: भारत को नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का विस्तार करना चाहिए और विद्युत गतिशीलता को बढ़ावा देना चाहिए।
  • पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार बनाए रखना: RBI को बाहरी आघातों का प्रभावी ढंग से सामना करने हेतु सुदृढ़ विदेशी मुद्रा भंडार बनाए रखना चाहिए।
  • सामान्य आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करना: भारत को राजकोषीय अनुशासन बनाए रखना चाहिए, मुद्रास्फीति को मध्यम रखना चाहिए और स्थिर आर्थिक वृद्धि सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि निवेशकों का विश्वास सुदृढ़ हो।

Source: TH

 

Other News of the Day

पाठ्यक्रम: GS2/शासन संदर्भ केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025 के प्रावधानों के अंतर्गत राष्ट्रीय खेल शासन (राष्ट्रीय खेल बोर्ड) नियम, 2026 तथा राष्ट्रीय खेल शासन (राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण) नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं। प्रमुख विशेषताएँ उद्देश्य: खेल प्रशासन को अधिक पारदर्शी, पेशेवर एवं डिजिटल रूप से संगठित बनाना। राष्ट्रीय खेल शासन (राष्ट्रीय खेल...
Read More

पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध संदर्भ ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान के विदेश मंत्रियों तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के विदेश मंत्री ने नई दिल्ली में 11वीं क्वाड देशों  के विदेश मंत्रियों की बैठक आयोजित की। प्रमुख विशेषताएँ इंडो-पैसिफिक समुद्री निगरानी सहयोग (IPMSC) पहल: क्वाड साझेदारों ने प्रथम बार इस पहल की शुरुआत की। इसका उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/ आंतरिक सुरक्षा संदर्भ भारत का महत्त्वपूर्ण अवसंरचना तंत्र तीव्रता से डिजिटल प्रौद्योगिकियों पर निर्भर होता जा रहा है। इनसे दक्षता में वृद्धि हुई है, किंतु साथ ही साइबर हमलों एवं दूरस्थ व्यवधानों के प्रति संवेदनशीलता भी बढ़ी है। राष्ट्रीय महत्त्वपूर्ण अवसंरचना क्या है? राष्ट्रीय महत्त्वपूर्ण अवसंरचना (CNI) उन परिसंपत्तियों, प्रणालियों, नेटवर्कों एवं सेवाओं...
Read More

पाठ्यक्रम: GS2/ शासन संदर्भ केंद्र सरकार ने जनांकिकीय परिवर्तनों का अध्ययन करने हेतु एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नाओलेकर करेंगे। समिति के उद्देश्य जनांकिकीय परिवर्तनों का आकलन: समिति भारत में हो रहे जनांकिकीय परिवर्तनों का व्यापक आकलन करेगी, असामान्य जनसंख्या परिवर्तनों वाले क्षेत्रों की पहचान करेगी तथा धार्मिक...
Read More

अल्गोज़ा(Algoza) पाठ्यक्रम: GS1/संस्कृति संदर्भ जैसलमेर के टागा राम भील को पारंपरिक राजस्थानी लोक संगीत को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करने हेतु प्राचीन वाद्ययंत्र अल्गोज़ा के माध्यम से योगदान के लिए पद्मश्री 2026 से सम्मानित किया गया। अल्गोज़ा क्या है? अल्गोज़ा राजस्थान, पंजाब, सिंध तथा पश्चिम भारत एवं पाकिस्तान के कुछ हिस्सों से जुड़ा पारंपरिक लोक वाद्ययंत्र...
Read More
scroll to top